
एसएमएस -प्रतिनिधी
मुंबई :नासिक मे एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मंत्री के भाषण में भारत के संविधान निर्माता डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के नाम का उल्लेख न होने पर एक महिला पुलिस कर्मी द्वारा सवाल पूछना अब विवाद का विषय बन गया है। संबंधित पुलिस कर्मी ने अपने संवैधानिक अधिकार का प्रयोग करते हुए यह प्रश्न उठाया था।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सवाल पूछे जाने के बाद वहां मौजूद एक वरिष्ठ महिला पुलिस अधिकारी ने उस पुलिस कर्मी को पकड़कर थाने ले जाने का निर्देश दिया। इस घटना के बाद प्रशासनिक हलकों और नागरिको में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
कई सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि शांतिपूर्ण और मर्यादित ढंग से सवाल पूछना अनुशासनहीनता नहीं बल्कि लोकतांत्रिक अधिकार है। उनका आरोप है कि वरिष्ठ अधिकारी की यह कार्रवाई अत्यधिक और अनुचित है।
इस प्रकरण में निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। साथ ही, पुलिस कर्मी को न्याय दिलाने और संबंधित वरिष्ठ अधिकारी की भूमिका की समीक्षा करने की भी मांग उठ रही है। नागरिकों का मत है कि सार्वजनिक पदों पर बैठे जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को संविधानिक मूल्यों के प्रति अधिक संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।
सार्वजनिक पदों पर बैठे जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को संविधानिक मूल्यों के प्रति अधिक संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।
हर नागरिकने सांविधानिक मूल्यों के प्रति आदर दिखाना चाहिए।
हर नागरिकने सांविधानिक मूल्यों के प्रति आदर दिखाना जरूरी है!
जयभीम जय संविधान