सूचना आयोग की कार्रवाई; ₹25 हजार का जुर्माना, आवेदक को ₹730 लौटाने का आदेश.

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RTI कार्यकर्ते विनोद घोलप.

एसएमएस -प्रतिनिधी -उत्कर्ष बोर्ले

मुंबई :: कोविड सेंटर से जुड़ी जानकारी समय पर उपलब्ध न कराने के मामले में महाराष्ट्र राज्य सूचना आयोग, मुंबई ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (पी/नॉर्थ वार्ड) के तत्कालीन सहायक अभियंता (परिरक्षण) मंदार तारी पर ₹25,000 का जुर्माना लगाया है। साथ ही आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि सूचना के लिए आवेदक से वसूले गए ₹730 रुपये वापस किए जाएं और मांगी गई सूचना पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाए।

मंदार तारी, जो उस समय पी/नॉर्थ विभाग में सहायक अभियंता (परिरक्षण) पद पर कार्यरत थे, बाद में उनकी बदली के/ईस्ट विभाग के बिल्डिंग एंड फैक्ट्रीज़ विभाग में सहायक अभियंता के रूप में हुई।

इसी बीच, लाचलुचपत प्रतिबंध विभाग (ACB), मुंबई ने उन्हें रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ लिया, जिसके चलते वह इस समय निलंबित हैं। इस पृष्ठभूमि में आयोग द्वारा लगाया गया ₹25,000 का दंड उनके वेतन से वसूला जा सकेग

आवेदक विनोद घोलप ने 22 फरवरी 2021 को कोविड-19 उपचार केंद्रों से संबंधित जानकारी सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी थी। शुल्क जमा करने के बावजूद उन्हें समय पर जानकारी नहीं दी गई, जिसके बाद उन्होंने प्रथम अपील और फिर द्वितीय अपील राज्य सूचना आयोग में दाखिल की।

सुनवाई में यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित अधिकारी ने जानकारी देने में अनुचित विलंब किया और कानूनी दायित्व पूरा नहीं किया।

राज्य सूचना आयोग का आदेश.

राज्य मुख्य सूचना आयुक्त राहुल भ. पांडे द्वारा दिए गए आदेश में कहा गया है की जन सूचना अधिकारी के रूप में मंदार तारी अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहे।सूचना देने में हुआ विलंब गंभीर है और यह RTI अधिनियम का उल्लंघन है।अतः तारी पर ₹25,000 का दंड लगाया जाता है, जिसे उनके वेतन से वसूला जाए।आवेदक द्वारा जमा ₹730 रुपये तुरंत लौटाए जाएं।मांगी गई सूचना पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाए।पी/नॉर्थ विभाग के कार्यालय अधीक्षक एवं संबंधित लेखाधिकारी को आदेश का पालन करके आयोग को रिपोर्ट भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।

यह फैसला नागरिकों के सूचना के अधिकार को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक निर्णय माना जा रहा है।
सूचना देने में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मिसाल इस आदेश से फिर स्थापित हुई है।


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