“आस्था की परीक्षा” और साझा नैतिक मूल्यों.!

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एसएमएम-प्रतिनिधी -उत्कर्ष बोर्ले

मुंबई, : इंटर-रिलिजियस सॉलिडैरिटी काउंसिल (IRSC), मुंबई ने इस्कॉन चौपाटी के सहयोग से गिरगांव चौपाटी स्थित भक्तिवेदांत हॉल, श्री श्री राधा गोपीनाथ मंदिर में शनिवार शाम एक अंतरधार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया। “आस्था की परीक्षा: दबाव के समय चरित्र को बनाए रखना” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न धर्मों के लोगों ने भाग लिया। यह आयोजन राम नवमी, लेंट, नवरोज़ और ईद के संदर्भ में किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत हिज ग्रेस केशव चंद्र दास प्रभु के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में आध्यात्मिक दृढ़ता और नैतिक आचरण के महत्व पर प्रकाश डाला।
इसके बाद इस्कॉन की राधा गोपाल चिल्ड्रन्स कमेटी (RGCC) के बच्चों ने राम नवमी और अंतरधार्मिक सौहार्द पर आधारित नृत्य प्रस्तुति दी, जिसने एकता और भक्ति का संदेश दिया।
मुख्य वक्ता डॉ. हिमांशु असनानी (हरिवंश दास प्रभु) ने अपने संबोधन में कहा कि सच्ची आस्था केवल मान्यताओं तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन के नैतिक आचरण में झलकती है। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियां ही व्यक्ति के चरित्र और आंतरिक शक्ति की असली परीक्षा होती हैं।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न धर्मों की महिला प्रतिनिधियों ने अपने विचार साझा किए। सिस्टर कृपा ने लेंट के दौरान आत्मचिंतन और त्याग के महत्व को बताया। हिताक्षी शाह ने जैन और ज़ोराष्ट्रियन परंपराओं में संयम और नवचेतना पर जोर दिया। ताहिरीह माखिजा ने बहाई धर्म में एकता और आध्यात्मिक अनुशासन की बात रखी, जबकि उज़मा नाहिद ने रमजान में रोजे के माध्यम से आत्मसंयम और करुणा के महत्व को समझाया। इस्कॉन की नंदिनी ने भगवान राम के आदर्शों का उल्लेख किया।
इस चर्चा के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि अनुशासन, करुणा, विनम्रता और जिम्मेदारी जैसे मूल्य सभी धर्मों में समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।
कार्यक्रम का समापन इस्कॉन के युवाओं द्वारा प्रस्तुत नाट्य प्रदर्शन से हुआ, जिसमें धर्म के नैतिक आचरण को प्रभावी रूप से दर्शाया गया।
इस अवसर पर IRSC के सह-संयोजक इरफान इंजीनियर ने 9 मई 2026 को बांद्रा स्थित ताज लैंड्स एंड में आयोजित होने वाले “मुंबई कॉन्क्लेव ऑफ रिलिजन्स” की घोषणा की। इस सम्मेलन में धार्मिक उग्रवाद और पर्यावरणीय जिम्मेदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी, जिसमें प्रसिद्ध गायक और मैग्सेसे पुरस्कार विजेता टी. एम. कृष्णा मुख्य वक्ता होंगे।
यह अंतरधार्मिक कार्यक्रम विभिन्न समुदायों के बीच संवाद, समझ और एकता को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण प्रयास रहा।


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