
एसएमएस-प्रतिनिधी – उत्कर्ष बोर्ले
सेंट जेरोम चर्च के मेले में सांस्कृतिक उल्लास..
मुंबई : ठाणे के काशी और मीरा गांव की सीमा पर स्थित पुर्तगाल कालीन सेंट जेरोम चर्च का वार्षिक मेला पिछले कुछ वर्षों से लोगों के आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। 26 दिसंबर को आयोजित इस मेले में ईस्ट इंडियन समाज के हजारों श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
मेले की खास पहचान पारंपरिक बैल–घोड़ा गाड़ी रही, जिसमें एक ओर बैल और दूसरी ओर घोड़ा जुता होता है। ठाणे, पालघर, नवी मुंबई तथा मुंबई के मढ, मार्वे, मालवणी, खारोडी, मनोरी, गोराई और उत्तन जैसे इलाकों से श्रद्धालु इस अनोखी गाड़ी के साथ मेले में पहुंचे, जिसने सभी का ध्यान आकर्षित किया।
श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में सजे-धजे नजर आए। चर्च में सुबह 6 बजे से अंग्रेज़ी, पुर्तगाली, मराठी, कोंकणी और हिंदी भाषाओं में प्रार्थनाएं आयोजित की गईं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
ईस्ट इंडियन समाज के लिए सेंट जेरोम चर्च का यह मेला क्रिसमस जितना ही महत्वपूर्ण माना जाता है। सामाजिक कार्यकर्ता मारियो ग्रेसियस ने कहा, “इस मेले की तैयारी हम पूरे वर्ष करते हैं। बैल और घोड़े का हमारे समाज में विशेष सांस्कृतिक महत्व है, और यह गाड़ी हमारी परंपरा की पहचान है।”
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