एसएमएस -प्रतिनिधी -एन.एस.एस.
महाराष्ट्र के ‘एंटी-कन्वर्ज़न बिल’ का कड़ा विरोध : बॉम्बे कैथोलिक सभा की जनजागृति बैठक में व्यक्त हुई गंभीर चिंताएँ..
मुंबई :महाराष्ट्र सरकार द्वारा प्रस्तावित ‘फ्रीडम ऑफ़ रिलिजन (एंटी-कन्वर्ज़न) बिल’ के विरोध में बॉम्बे कैथोलिक सभा द्वारा चलाया जा रहा जनजागरण अभियान रविवार को बोरीवली (पश्चिम) के सेंट पॉल VI हॉल में आयोजित हुआ। इस इंटरैक्टिव कार्यक्रम में 200 से अधिक नागरिकों ने सहभाग लेकर बिल के संभावित दुष्परिणामों पर आपली चिंता व्यक्त की।
दशकों की सेवा अब ‘संदेह’ में?
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि कैथोलिक संस्थाएँ वर्षों से गरीब, बीमार, बेघर और वंचितों की सेवा बिना किसी भेदभाव के करती आई हैं—लेकिन प्रस्तावित बिल से इन मानवीय कार्यों को जबरन धर्मांतरण के रूप में गलत तरीके से प्रस्तुत किए जाने का धोका निर्माण हो सकता है।
“हमारे देश में जबरदस्ती और धोखाधड़ी को रोकने के लिए पहले से ही पर्याप्त कानून मौजूद हैं। नया बिल तो सेवा और करुणा पर ही निगरानी व संदेह का वातावरण बढ़ाएगा।”—बैठक में व्यक्त प्रमुख भावना.
बिल के खिलाफ उठे मुख्य मुद्दे
स्वैच्छिक धर्मांतरण प्रक्रिया को सरल किया जाए; यह संविधान के अनुच्छेद 21 और 25 द्वारा संरक्षित मूल अधिकार है।स्वैच्छिक धर्मांतरण का अपराधीकरण व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन है।’प्रलोभन’ शब्द की स्पष्ट और न्यायिक परिभाषा होनी चाहिए।बलपूर्वक धर्मांतरण का सबूत देने की जिम्मेदारी आरोपी पर नहीं, बल्कि शिकायतकर्ता पर होनी चाहिए।शिकायतकर्ता केवल पीड़ित व्यक्ति, या नाबालिग होने पर उसके माता-पिता हों; तीसरे पक्ष की शिकायतें स्वीकार न की जाएँ।झूठी शिकायतें करने वालों पर भी बराबर की सख्त कानूनी कार्रवाई हो।अंतरधार्मिक विवाहों में हस्तक्षेप असंवैधानिक है; सर्वोच्च न्यायालय ने दो वयस्कों के स्वैच्छिक विवाह को अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार माना है।
बिल का दुरुपयोग कर अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाए जाने की आशंका; अन्य राज्यों में ऐसी घटनाएँ पहले ही देखने को मिली हैं।इस अवसर पर मान्यवर बिशप डॉमिनिक सावियो फ़र्नांडिस, फादर हेनरी डी’सूज़ा, पारिश पुजारी एवं आध्यात्मिक सलाहकार नॉर्बर्ट मेंडोसा, अध्यक्ष, बॉम्बे कैथोलिक सभा,डॉल्फी डी’सूज़ा, प्रवक्ता, बॉम्बे कैथोलिक सभा ने अपने विचार रखे
सभी वक्ताओं ने बिल को समाज में भय और असुरक्षा की भावना बढ़ाने वाला बताया।इस अभियान के तहत जल्द ही मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्रियों को विस्तृत ज्ञापन सौंपा जाएगा।
संगठन ने नागरिकों से अपील की कि ऐसे बिलों के विरोध में आवाज उठाना आवश्यक है, ताकि राज्य में शांति, धार्मिक स्वतंत्रता और सामुदायिक सौहार्द बना रहे।
बैठक की समाप्ति फोटोग्राफ़ साझा करने और सभी प्रतिभागियों के आभार प्रदर्शन के साथ हुई।
जीस देश अंधे बहरे गूंगे लोग रहते हैं वहां लोगों के भलाई के लिए कितना भी अच्छा सोचो कोई फायदा नहीं अगर कुछ गलत लगता है तो सभी को मिलकर आवाज उठानी चाहिए
Govt should consider their issues
Govtshould consider christian communitiesissues regarding said bill