एसएमएस -प्रतिनिधी -उत्कर्ष बोर्ले


एसएमएस -प्रतिनिधी -उत्कर्ष बोर्ले
मुंबई : महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध हो रहे अन्याय के खिलाफ संघर्ष में प्रत्येक नागरिक की भूमिका महत्त्वपूर्ण है, और इसमें दृष्टिहीन व्यक्ति भी प्रभावी योगदान दे सकते हैं, ऐसा मत समाजशास्त्री कुतुबजहाँ किडदवाई ने व्यक्त किया।
वे राष्ट्र सेवा दल, मालवणी, सफल विकास वेलफेयर सोसायटी तथा नीड़ा (NEEDA) संस्था द्वारा आयोजित कानूनों पर आधारित जनजागरूकता व्याख्यान में बोल रही थी। इस अवसर पर दृष्टिहीन युवक दानिश शेख द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में किदवाई ने कहा, “दृष्टिदोष होने के बावजूद सतर्क रहना, भरोसेमंद लोगों को तुरंत जानकारी देना, हेल्पलाइन नंबरों का उपयोग करना तथा संकट की स्थिति में अकेले न जाकर समूह में रहना—इन उपायों के माध्यम से दृष्टिहीन व्यक्ति अपनी महिला मित्रों की सहायता कर सकते हैं।”
कार्यक्रम के दौरान इस मुद्दे पर भी चर्चा हुई कि सहायता मांगने पर कई बार प्रशासन या अन्य लोगों द्वारा अपमानजनक व्यवहार का सामना करना पड़ता है। इस संदर्भ में मार्गदर्शन करते हुए सिद्दीकी ने कहा कि ऐसी स्थिति में शांति बनाए रखना, घटना का विवरण लिखित रूप में दर्ज करना, नीड़ा (NEEDA) जैसी स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद लेना तथा आवश्यकता पड़ने पर वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत करना आवश्यक है।
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि जागरूकता, एकता, साहस और करुणा ही अन्याय के खिलाफ सबसे सशक्त हथियार हैं। किसी को भी अकेले संघर्ष करने की आवश्यकता नहीं है; सामूहिक प्रयासों से ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।
इस अवसर पर व्याख्याता कुतुब जहाँ किदवाई का स्वागत वैशाली महाडिक द्वारा तुलसी का पौधा भेंट कर किया गया। कार्यक्रम का संचालन निसार अली सय्यद ने किया तथा उपस्थितों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में उत्कर्ष बोर्ले, कृष्णा वाघमारे, सोमा डे, सिद्धेश्वरी शर्मा, तौहिद शेख सहित वसई से तुकाराम हारपुडे और अंधेरी से राजेश बनकर की विशेष उपस्थिति रही।

Great initiative
Good thought
इस समाज में बहुत सारे गुनाह हों रहे हैं पर हमें संविधान के बारे में जानकारी नहीं होने के कारण हम लोग कुछ कर नहीं पाते हैं इस लिए संविधान ने हमें दिये हुऐ हमारे हक्क समझना बहुत जरूरी है