
एसएमएस -प्रतिनिधी -उत्कर्ष बोर्ले.
मुंबई : महानगरपालिका के ‘के वार्ड’ का कामकाज एक बार फिर संदेह के घेरे में आ गया है। विलेपार्ले पूर्व स्थित शहाजी राजे मार्ग पर, भुता स्कूल के सामने छत्रपति शिवाजी महाराज नगर बस्ती में जनता के पैसे की खुली बर्बादी का गंभीर मामला सामने आया है।
गैलेक्सी और दुर्वांकुर बस्तियों को जोड़ने वाली एक संकरी गली में कुछ दिन पहले ही लाखों रुपये खर्च कर नया डामरी स्पीड ब्रेकर बनाया गया था। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि बिना किसी पूर्व सूचना के मनपा कर्मचारियों ने बुलडोज़र की मदद से उसी स्पीड ब्रेकर को तोड़कर पूरी तरह हटा दिया।
सवाल एक ही है — जब तोड़ना ही था, तो बनाया क्यों गया?
इस काम को प्रशासनिक मंज़ूरी किसने दी? नक्शा किसने बदला? और इस पूरे खर्च की ज़िम्मेदारी आखिर कौन लेगा?
यह पैसा किसका है? जनता के टैक्स का! फिर इस तरह से सार्वजनिक धन को बर्बाद करने का अधिकार मनपा को किसने दिया, यह गुस्से भरा सवाल स्थानीय नागरिक उठा रहे हैं। ‘के वार्ड’ में इससे पहले भी सड़कों, ड्रेनेज और डामरीकरण के कामों में इसी तरह की फिजूलखर्ची के आरोप लगते रहे हैं। अब यह मामला भी उसी कड़ी का हिस्सा तो नहीं, ऐसी आशंका गहराती जा रही है।
इस पूरे प्रकरण की तत्काल उच्चस्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग जोर पकड़ रही है। नागरिकों का कहना है कि मनपा आयुक्त स्वयं इस मामले में दखल दें, अन्यथा जनता का पैसा इसी तरह मिट्टी में मिलता रहेगा।
साथ ही स्थानीय विधायक, सांसद, नवनिर्वाचित नगरसेवक और सार्वजनिक निर्माण विभाग की जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए। क्योंकि अब यह धारणा बन रही है कि मौन रहना अप्रत्यक्ष सहमति के बराबर है।
‘के वार्ड’ में हुआ यह मामला अपवाद है या नियम?
इसका जवाब अब प्रशासन को ही देना होगा।
Aysa kahi mamlo main prasasan k pas koi jawab hota hi nahi.
फार धक्कादायक गोष्ट आहे पण कारवाई होनार का विचार करण्यासारखी गोष्ट आहे
कोणाच्या हितासाठी पालिका कर्मचारी लागले कामाला??
विकासक?
नेता?