8 वर्षीय रुद्रन की ‘PM राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ के लिए सिफारिश..

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एसएमएस -प्रतिनिधी -उत्कर्ष बोरले.

मुंबई : मालाड (पश्चिम) के सुंदर नगर में रहने वाले मात्र 8 वर्षीय रुद्रन ऋषभ हलवाई ने अपनी असाधारण और बहुमुखी प्रतिभा के दम पर देशभर का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। विभिन्न क्षेत्रों में 7 विश्व रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कराने वाले रुद्रन की सिफारिश प्रतिष्ठित ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2026’ के लिए की गई है।
रुद्रन ने कम उम्र में योग, शतरंज, संगीत, जिम्नास्टिक, मार्शल आर्ट्स और रुबिक्स क्यूब कला जैसे कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उनकी बहुआयामी प्रतिभा के कारण उन्हें ‘चाइल्ड प्रोडिजी’ और ‘द ऑलराउंडर किंग’ के नाम से भी जाना जाता है।
रुद्रन के 7 विश्व रिकॉर्ड
रुद्रन ने 3 मिनट 6 सेकंड तक चक्रासन मुद्रा में रहकर ‘इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में विश्व रिकॉर्ड दर्ज कराया है। इसके अलावा, आंखों पर पट्टी बांधकर मात्र 2 मिनट 14 सेकंड में शतरंज की सभी गोटियों को सही स्थान पर सजाने का रिकॉर्ड भी उनके नाम है।
उन्होंने जिम्नास्टिक, रुबिक्स क्यूब सॉल्विंग, कीबोर्ड और तबला वादन, कुंग फू तथा श्लोक पाठ जैसी विभिन्न गतिविधियों को लगातार एक साथ प्रस्तुत कर एक अनोखा विश्व रिकॉर्ड भी बनाया है।
संगीत और कला में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन
इलेक्ट्रॉनिक कीबोर्ड पर पांच अलग-अलग प्रकार की धुनें बजाकर रुद्रन ने संगीत के क्षेत्र में अपनी रचनात्मकता और तकनीकी दक्षता का परिचय दिया है। वहीं, उन्होंने 2014 रुबिक्स क्यूब्स का उपयोग कर देश के वीरों और प्रेरणादायक व्यक्तित्वों को समर्पित भव्य मोज़ेक चित्र तैयार किए हैं। इनमें अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलयम्स और उद्योग जगत के दिग्गज रतन टाटा के चित्र भी शामिल हैं।
दिग्गजों से मिला सम्मान
रुद्रन की इस उपलब्धि की सराहना भारत के पहले पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता मुरलीकांत pने की है। इसके अलावा ‘मालाड मस्ती’ महोत्सव में विधायक Aslam Shaikh ने उनका सम्मान किया। वहीं, मालाड आरएसईटी परिसर में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की उपकप्तान स्मृती मानधना Mandhana ने भी रुद्रन का विशेष सत्कार किया।
बच्चों और अभिभावकों के लिए प्रेरणा
रुद्रन के पिता ऋषभ दिनेश हलवाई का कहना है कि बच्चों का विकास केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें खेल, कला, संगीत, योग और अन्य गतिविधियों में भी आगे बढ़ने के अवसर मिलने चाहिए। रुद्रन की उपलब्धियां अन्य बच्चों को अपनी रुचियों और प्रतिभाओं को निखारने के लिए प्रेरित करेंगी।
कम उम्र में हासिल की गई रुद्रन की ये उपलब्धियां न केवल मालाड, बल्कि पूरे महाराष्ट्र और देश के लिए गर्व का विषय हैं।


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