
एसएमएस -प्रतिनिधी -उत्कर्ष बोर्ले
मुंबई : गोरेगांव (पश्चिम) स्थित आवर लेडी ऑफ रोसरी चर्च में बॉम्बे कैथोलिक सभा यूनिट की ओर से आज 136वीं डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जयंती के अवसर पर प्रबोधन कार्यक्रम आयोजित किया गया। साथ ही एसएससी और एचएससी बोर्ड परीक्षा में 85 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले 12 मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि फा. (डॉ.) फ्रेझर मस्कारेनहास (एस.जे.), पूर्व प्राचार्य, सेंट जेवियर्स कॉलेज, मुंबई थे। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत तीन विचारोत्तेजक प्रश्नों से की—क्या डॉ. आंबेडकर, पोप लियो और यीशु मसीह केवल धार्मिक नेता थे या राजनीतिक नेता भी थे? उन्होंने कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा निर्मित भारतीय संविधान ने सभी नागरिकों को सम्मान और समानता के साथ जीने का अधिकार दिया है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
एडवोकेट रैचेल डिसिल्वा ने संविधान की प्रस्तावना ‘We the People of India’ के अंतर्गत न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों को विस्तार से समझाया। संविधान जागर समिति के प्रो. अरविंद निगले ने संविधान के क्रियान्वयन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं और कुछ कानून संविधानिक अधिकारों को प्रभावित कर रहे हैं।
पर्यावरणविद मन्नान देसाई ने मैंग्रोव संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के लिए जनभागीदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। बॉम्बे कैथोलिक सभा के अध्यक्ष नॉर्बर्ट मेंडोंसा ने मतदाता सूची में नाम सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान की जानकारी दी।
सभा के प्रवक्ता डॉल्फी डिसूजा ने अपने समापन भाषण में कहा कि लोकतंत्र केवल दर्शक बनने का नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदारी का माध्यम है। उन्होंने प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन का विरोध करने और सभी के लिए समान रूप से कानून लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम का समापन मुख्य अतिथि द्वारा मेधावी विद्यार्थियों को पुरस्कार प्रदान कर किया गया।
असे आयोजन सतत केले पाहिजे कारण शिक्षित लोकाना सुदधा संविधान काय आहे त्याचा फ़ायदा कसा घयावा हेच माहित नाही आहे
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