बारिश के लिए मुंबई की मस्जिदों में विशेष दुआ..

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मस्जिद मे मुस्लिम लोग बारिश के लिये विशेष दुआ (प्रार्थना )करते हुये.

एसएमएस -प्रतिनिधी – उत्कर्ष बोरले.

मुंबई : पर्याप्त बारिश नहीं होने की चिंता के बीच माहिम पश्चिम स्थित माहिम जामा मस्जिद, माहिम कब्रिस्तान मस्जिद और बिस्मिल्लाह मस्जिद में शुक्रवार को बारिश के लिए विशेष दुआ की गई। जुमे की नमाज के बाद अल्लाह की रहमत और भरपूर बारिश की कामना करते हुए सामूहिक प्रार्थना की गई।
माहिम जामा मस्जिद में जुमे की नमाज के बाद इमाम एवं मौलाना साद ने नमाजियों से “अस्तग़फिरुल्लाहा रब्बी मिन कुल्लि ज़म्बिन व अतूबु इलैह” का विर्द करने की अपील की। इसका अर्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि, “मैं अपने हर गुनाह के लिए अल्लाह से माफी मांगता हूं और उसी की ओर तौबा करता हूं।” उन्होंने कहा कि तौबा और इस्तिग़फार अल्लाह की रहमत और बारिश जैसी नेमतों को प्राप्त करने का एक प्रभावशाली माध्यम है।
माहिम जामा मस्जिद के ट्रस्टी फहाद खलील पठान ने कहा कि पवित्र कुरआन और हज़रत मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की शिक्षाओं में इस्तिग़फार को बारिश की बरकत हासिल करने का महत्वपूर्ण जरिया बताया गया है।
माहिम कब्रिस्तान मस्जिद के ट्रस्टी सुहैल खंडवानी ने कहा कि बारिश पौधों, जानवरों और इंसानों के जीवन के लिए आवश्यक मीठे पानी का प्रमुख स्रोत है। इससे नदियां, झीलें और भूजल स्रोत पुनर्भरित होते हैं, जिससे पेयजल, कृषि और स्वच्छता के लिए निरंतर जल उपलब्ध होता है।
माहिम कब्रिस्तान मस्जिद के प्रशासक शब्बर काबली ने कहा कि पानी मानव जीवन, खेती, भोजन तैयार करने, स्वच्छता, उद्योग, जैव विविधता, ऊर्जा उत्पादन, परिवहन और जलवायु संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
मस्जिद के ट्रस्टी मुदस्सर लांबे ने महाराष्ट्र की सभी मस्जिदों से बारिश के लिए विशेष दुआ आयोजित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि पानी जलाशयों को भरने, खाद्य उत्पादन को बढ़ावा देने और जलविद्युत उत्पादन के लिए अनिवार्य है।
इस बीच, माहिम रेजिडेंट्स ग्रुप के सदस्यों ने भी जल संरक्षण का संदेश दिया। सैयद गुलज़ार राणा ने नागरिकों से पानी की बर्बादी रोकने की अपील करते हुए कहा कि दांत साफ करते समय, शेविंग करते समय या वाहन धोते समय नल खुला छोड़ना तथा टपकते नलों की अनदेखी करना हर महीने सैकड़ों लीटर पानी की बर्बादी का कारण बनता है।
माहिम रेजिडेंट्स ग्रुप के सैयद एम. इस्माइल ने कहा कि जल संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है और आने वाली पीढ़ियों के लिए इस बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधन को सुरक्षित रखना हम सभी का कर्तव्य है।


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2 thoughts on “बारिश के लिए मुंबई की मस्जिदों में विशेष दुआ..

  1. इस हालत को हम ही लोग जिम्मेदार हैं अपने मतलब के लिए हम पेड़ काट रहे हैं बड़े बड़े कारखानों से पुराने गाड़ियों से निकलने वाले धुवे के कारण अब धरती पर कभी भी कुछ भी घट रहा है समय हमें सम्भलने का मौका दे रही है सम्भल जाये

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